बलरामपुरः शिक्षिकों ने बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन का किया बहिष्कार

बलरामपुर जिले में बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने से शिक्षकों के बहिष्कार कर दिया है. शिक्षकों के बहिष्कार के चलते तीन बाद भी जिले में कॉपियों का मूल्यांकन शुरु नहीं हो सका है.

दरअसल, गत 17 मार्च से 600 से ज्यादा माध्यमिक शिक्षकों ने डीआईओएस को हटाए जाने की मांग को लेकर मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार कर दिया था. आन्दोलनरत शिक्षकों ने डीआईओएस पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल हटाने मांग की है.

शिक्षकों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक जिला विद्यालय निरीक्षक हृदय नारायण त्रिपाठी को हटाया नहीं जाता तब तक वो उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं करेंगे. डीआईओएस को हटाए जाने को लेकर शिक्षकों ने मूल्यांकन केन्द्र एमपीपी इन्टर कालेज में प्रदर्शन भी शुरु कर दिया है, जिससे पिछले तीन दिनों से मूल्यांकन कार्य ठप है, जिससे शिक्षा विभाग में हडकम्प मचा हुआ है.

हालांकि मामले की गम्भीरता को देखते हुए शासन के निर्देश पर शिक्षकों से वार्ता करने माध्यमिक शिक्षा के उपनिदेशक पहुंचे थे, लेकिन शिक्षकों ने उनके सामने भी वहीं मांग दोहरा दी है. ऐसा लगता है कि डीआईओएस के भ्रष्टाचार से त्रस्त शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और डीआईओएस को हटाए जाने तक वो काम पर नहीं लौटेंगे.

फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर मचा घमासान अब सड़क पर आ गया है. इलाहाबाद में झूंसी पुल के पास सोमवार को एक बड़ी होर्डिंग लगाकर इस हार के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफे की मांग की गई है. बता दें कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई फूलपुर सीट पर अब सपा-बसपा गठजोड़ के प्रत्याशी नागेन्द्र सिंह पटेल का कब्जा है.

इस होर्डिंग में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने डिप्टी सीएम पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की है. भगवा रंग में बनी इस होर्डिंग में प्रधानमंत्री की फोटो और कमल का फूल भी बना है. साथ ही निवेदक के स्थान पर समस्त उपेक्षित कार्यकर्ता भाजपा लिखा है.

गौरतलब है कि फूलपुर की सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है. लेकिन 2014 में पहली बार केशव प्रसाद मौर्य ने फूलपुर सीट बीजेपी के खाते में दिलाई थी. मोदी लहर में केशव ने यहां पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. इस बार कौशलेन्द्र सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाकर बीजेपी ने वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की थी. लेकिन सपा-बसपा के गठजोड़ के आगे बीजेपी नहीं टिक सकी.

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