दोस्ती की ‘डील’ तो नहीं डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या

लखनऊ : बागपत जिला जेल में हुई मुन्ना बजरंगी की हत्या के पीछे पूर्वांचल के दो माफिया डॉन के बीच पनप रही दोस्ती की ‘डील’ का ऐंगल भी तलाशा जा रहा है। हत्याकांड की विवेचना कर रही पुलिस टीम इस दिशा में भी काम कर रही है। अंडरवर्ल्ड से जुड़े सूत्रों की मानें तो दोनों माफिया के बीच दोस्ती के रास्ते में सिर्फ एक ही गांठ ऐसी थी, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता था।

वह गांठ है बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या। माना जा रहा है कि दोस्ती के रास्ते की उस गांठ को खत्म करने के लिए ही मुन्ना बजरंगी की बलि दी गई। मार्च 2013 में एक पुलिस अफसर की हत्या के बाद जरायम की दुनिया के नए समीकरण बने। बताया जा रहा है कि हत्याकांड में नाम आने पर प्रदेश सरकार के एक मंत्री काफी परेशान चल रहे थे। उस वक्त मुख्तार अंसारी ने बैक डोर से उनकी काफी मदद की।

मंत्री ने दोस्ती करवाने की कमान संभाली

उन्हीं दिनों मुख्तार अंसारी ने मंत्री से कहा था कि वह अब बृजेश सिंह से दुश्मनी खत्म करना चाहते हैं। मंत्री ने दोस्ती करवाने की कमान संभाली और दोनों गैंग के बीच सुलह-समझौतों के लिए लंबी ‘बैठकों’ का दौर चला। इसी बीच बृजेश सिंह भी माननीय बन गए। जरायम की दुनिया से राजनीति में आने के बाद दोनों ‘शांति’ चाहते थे। दोनों के विधान भवन आने के बाद इसके रास्ते तलाशे जाने लगे। चर्चा है कि मंत्री की पहल पर दोनों ने एक-दूसरे की दोस्ती कबूल ली। सूत्रों की मानें तो एक बड़ी डील के तहत इन दो धुर विरोधियों ने हाथ मिलाया।

बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच सुलह के बाद दोनों ओर से एक-दूसरे की मदद भी शुरू हो गई। सूत्रों का दावा है कि मऊ के बहुचर्चित ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को बरी करवाने के लिए बृजेश सिंह ने दबाव डाला। उधर, मुख्तार भी उसरी चट्टी और कुंडेसर हत्याकांड में बृजेश को बरी करवाने की कोशिश में लग गए। तय हुआ कि गाजीपुर के भांवरकोल कांड में भी मुख्तार अंसारी पूरी तरह बृजेश की मदद करेंगे।

इसके बदले बृजेश सिंह पर दबाव बनाया गया कि वह कृष्णानंद राय हत्याकांड में मुख्तार को बचाएं। चूंकि, कृष्णानंद राय हत्याकांड कई मायनों में बृजेश सिंह के लिए बहुत अहम है। माना जा रहा है कि इसीलिए डील हुई कि बृजेश को संतुष्ट करने के लिए कृष्णानंद राय हत्याकांड के मुख्य शूटर की बलि दी जाएगी और इस बलि के बाद बृजेश कृष्णानंद राय से जुड़े लोगों को संतुष्ट कर हत्याकांड में मुख्तार को बचाएंगे।

कई ‘करीबी’ अंतिम संस्कार में नहीं आए

मंगलवार को मुन्ना बजरंगी का वाराणसी में अंतिम संस्कार हुआ। मुन्ना बजरंगी के शूटरों की सूची में शामिल रिंकू सिंह गाजीपुर जेल में और मुन्नू तिवारी बांदा जेल में है। डॉक्टर उर्फ अमजद और वकील पांडेय जमानत पर जेल से बाहर जरूर हैं, पर पुलिस को काफी प्रयास के बाद भी इनकी गतिविधियों के बारे में कुछ पता नहीं लग पा रहा है। खुद को बजरंगी का करीबी बताने वाले ये लोग अंतिम संस्कार में नजर नहीं आए।

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