लखनऊ केजीएमयू में इलाज कराना है तो पंखा बाजार से लाओ,

लखनऊ । हर वर्ष सरकार केजीएमयू को करोड़ों का बजट दे रही है, लेकिन मरीज मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं। यहा वार्डो में भर्ती मरीज गर्मी व उमस से बेहाल है। वहीं राहत के लिए तीमारदार बाजार से आठ सौ रुपये का पंखा लाकर बेड पर लगा रहे हैं। केजीएमयू में करीब साढ़े चार हजार बेड हैं। वहीं 70 के करीब भवन हैं। इन भवनों में कार्यालय, डॉक्टरों व स्टाफ के कक्ष के साथ-साथ मरीजों के वार्ड हैं। संस्थान में ट्रामा सेंटर, कलाम सेंटर, शताब्दी-फेज वन, शताब्दी फेज-टू, डेंटल न्यू बिल्डिंग व न्यू ओपीडी ब्लॉक में सेंट्रलाइज एसी सिस्टम हैं।

वहीं शेष भवनों में पंखा, विंडों व स्पिलिट एसी लगाए गए हैं, मगर यह सब सुविधाएं स्टाफ के कक्ष में ही दुरुस्त हैं। वहीं वार्ड में भर्ती मरीजों को पंखे की हवा भी नसीब नहीं हो पा रही है। विभागों के वार्डो से तमाम पंखे गायब हो चुके हैं। जिन बेडों पर पंखा हैं वह रेंग-रेंग कर चल रहे हैं। ऐसे में मरीज गर्मी से बेहाल हैं। तीमारदार मजबूरन आठ-आठ सौ रुपये के पंखे बाजार से खरीदकर मरीज के बेड पर लगवाए हैं।

पीआरओ भवन के प्रथम तल पर पल्मोनरी सर्जिकल यूनिट है। इसमें बेडों पर पंखे लगे हैं, मगर यह काफी धीमे चल रहे हैं। वहीं फेफड़े में पस से परेशान भर्ती मरीज गर्मी से बेहाल हैं। उनके माइनर ऑपरेशन कर पस निकालने के लिए ड्रेनेज पाइप डाली गई है। ऐसे में गर्मी से संक्त्रमण से बचाव के लिए परिजनों ने आठ-आठ सौ रुपये का टेबल फैन खरीदकर लगवाया है। बाल रोग विभाग में भी व्यवस्था बदहाल, बच्चे परेशान

बाल रोग की व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं। यहा छोटे-छोटे नवजात भर्ती हैं, मगर गर्मी में सभी परेशान हैं। विभाग के ग्राउंड फ्लोर पर कई कमरों में खिड़की खोलकर गर्मी से राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं तमाम परिजनों ने बच्चों के बेडों के पास खरीदकर पंखे लगाए हैं। क्वीन मेरी में भी बुरा हाल,

क्वीन मेरी के प्रथम तल स्थित पोस्ट ऑपरेटिव व जनरल वार्ड का बुरा हाल है। यहा वार्डो में दिन में भी अंधेरा रहता है। रोशनी का पर्याप्त बंदोबस्त नहीं है। वहीं एक वार्ड में आठ बेड पर दो पंखे लगे हैं। शेष दो वार्ड में चार-चार पंखे लगे हैं। यह सभी मरम्मत के अभाव में रेंग-रेंग कर चल रहे हैं। धीमी गति से चल रहे पंखों की हवा बेड पर भर्ती मरीज तक नहीं पहुंचती है। ऐसे में तीमारदारों ने भर्ती महिलाओं के लिए बाजार से लाकर पंखा लगवाया है। सर्जिकल वार्ड से भी पंखे गायब

मुख्य पीआरओ भवन के प्रथम तलब पर सर्जिकल वार्ड हैं। यहा कई बेडों पर पंखे के हुक तो हैं, मगर वह खाली हैं। बेडों पर पंखा न होने से मरीज परेशान हैं। सर्जिकल वार्ड-दो व तीन में स्थिति काफी बदतर है। सोमवार को मरम्मत का कार्य के चलते वार्ड में गंदगी की भी भरमार थी। यहा भी कई मरीजों ने बाजार से खरीदकर पंखे लगवाए हैं।

बेहाल मरीजों का कोई पुरसाहाल नहीं

संस्थान के यूरोलॉजी, ईएनटी, नेत्र रोग विभाग, गाधी वार्ड, मेडिसिन, आथरेपैडिक विभाग, गठिया रोग, डेंटल विभाग समेत तमाम विभागों में मरीज गर्मी से बेहाल हैं। इनमें कई बेडों पर जहा पंखे हैं ही नहीं तो जहा हैं वह भी खराब हैं। धीमी गति से चल रहे पंखे मरीजों को राहत नहीं दे पा रहे हैं। वहीं अफसर व इंजीनियर बेपरवाह बने हैं। अफसर नहीं लेते राउंड

केजीएमयू में दो दर्जन डॉक्टर चिकित्सकीय सेवाओं की मॉनीटरिंग व पेशेंट केयर को लेकर पदों पर तैनात हैं, मगर यह प्रशासनिक अफसर वार्डो में राउंड लेने में हीलाहवाली करते हैं। तीमारदार राकेश, सुमन, संजय आदि ने कहा कि वार्डो में यदि अफसरों का राउंड सुनिश्चित कर दिया जाए तो मरीजों की समस्याएं ही दूर हो जाएं। मगर कोई भी अधिकारी वार्डो का राउंड नहीं लेता है। यहा तक कि विभागाध्यक्ष भी कभी-कभार ही वार्डो का राउंड पर आते हैं। कहा जा रहा करोड़ों का बजट

केजीएमयू को सरकार ने सात सौ करोड़ से अधिक वार्षिक बजट दिया था। इसमें सौ करोड़ से अधिक का कंटीजेंसी मद है। इसी से संस्थान में मरम्मतीकरण आदि के कार्य कराए जाते हैं। हर वर्ष एसी व पंखों की मरम्मत पर लाखों खर्च भी कर दिए जाते हैं। मगर मरीजों के वार्डो में अव्यवस्थाएं जस की तस बनी रहती हैं।

क्या कहना है डॉ. एसएन का?

केजीएमयू सीएमएस शखवार डॉ. एसएन का कहना है कि इंजीनियर को निर्देश दूंगा। जिन वार्डो में पंखे खराब होंगे, वहा तुरंत सही कराए जाएंगे। इसके अलावा जिन बेडों पर पंखे नहीं हैं, वहा नए लगवाए जाएंगे।

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