बुराड़ी कांड में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फांसी से हुई 10 की मौत, 11वें पर सस्पेंस

दिल्ली के बुराड़ी में हुए 11 लोगों के मौत मामले में भाटिया परिवार के 10 लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है. पुलिस का कहना है कि 10 लोगों की मौत लटकने की वजह से हुई है. शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं हैं. इससे साफ होता है कि सभी लोगों ने फांसी लगाकर खुदकुशी की है. इस मामले में घर की सबसे बुजुर्ग महिला नारायणी देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है. नारायणी देवी की बॉडी कमरे में जमीन पर पड़ी मिली थी.

इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी डॉक्टर की राय मेल नहीं खा रही है. इसीलिए मंगलवार को डॉक्टर्स की टीम ने घर का मुआयना भी किया था. घर का मुआयना करने के बाद डॉक्टर्स की टीम आपस में बातचीत के बाद फाइनल रिपोर्ट देगी, जिससे नारायणी देवी की मौत की असल वजह पता चल पाएगी. बताते चलें कि भाटिया परिवार के 11 सदस्य अपने घर में फांसी के फंदे से लटकते हुए पाए गए थे. इसके बाद इस मामले में लगातार खुलासे हो रहे हैं.

पिता की मौत के बाद हुआ था हमला

यह पूरा मामला बेहद नाटकीय तरीके से शुरू हुआ था. पिता की मौत के बाद दुकान पर ललित का झगड़ा हुआ था. हमलावरों ने उसे दुकान के अंदर बंद करके बाहर से आग लगा दी थी. ललित की जान तो बच गई लेकिन दहशत में उसकी आवाज चली गई थी. इस घटना से ललित व परिवार पूरी तरह टूट गया. कई साल तक ललित की आवाज नहीं लौटी थी.

ललित के सपने में आने लगे पिता

एक रजिस्टर के मुताबिक ललित घर वालों को बताता था कि वो पिता की आत्मा से बात करता है. सूत्रों का कहना है कि ललित के सपने में एक दिन पिता आए और कहा कि वो चिंता न करे, जल्दी ही उसकी आवाज लौट आएगी. इस सपने को सुबह उठते ही उसने परिवार के साथ लिखकर साझा किया. फिर आए दिन सपने में ललित को अपने पिता दिखाई देने लगे.

मांगलिक बहन की तय हो गई शादी

कुछ दिनों बाद ललित की जब आवाज में सुधार हुआ तो उसकी अटूट आस्था शुरू हो गई. इसके बाद तो ललित अक्सर पिता की आत्मा से मिलने करने की करने लगा. वो जो कुछ कहता परिवार के लोग पिता का आदेश मानकर पूरा करते. इत्तफाक देखिये. ललित की बहन की मांगलिक प्रियंका की शादी में अड़चनें आ रही थी. पूजा-पाठ के बाद उसकी शादी तय हो गई.

ललित पर विश्वास करने लगा परिवार

यही नहीं, पहले भाटिया परिवार के पास तीन दुकानें हो गई. पूरा परिवार इसका श्रेय पिता के बताए रास्ते को देता था और ललित इसका माध्यम था. इसलिए परिवार के लोग ललित को पिता की तरह सम्मान देते थे. उस रोज जो प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, उसके पीछे मकसद परिवार को मिली खुशियों के लिए ईश्वर का धन्यवाद ज्ञापन करना था.

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