सुप्रीम कोर्ट ने 7 साल की बच्ची से रेप-हत्या के दोषी की सजा बरकरार रखी,

पाकिस्तान। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 7 वर्षीय जैनब के बलात्कार और हत्या के दोषी शख्स की मौत की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी इमरान अली की अपील को खारिज कर दिया। इमरान ने आतंकवाद विरोधी अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये समीक्षा याचिका खारिज की।

इस फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट, संयुक्त जांच दल और पहले के इस फैसले को बनाए रखने के लिए धन्यवाद कहा। इसके बाद उन्होंने आरोपी की फांसी की मांग को भी दोहराया।इससे पहले आरोपी अली ने लाहौर हाई कोर्ट में भी मौत की सजा के खिलाफ अपील की थी लेकिन वहां भी उसकी याचिका खारिज हो गई।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में जनवरी माह में घटी इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध की लहर उठ गई थी। इस मामले में कोर्ट ने चार दिनों में अपना फैसला सुनाया था। 17 फरवरी को आतंकवाद विरोधी अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 23 वर्षीय इमरान अली को हत्या, अपहरण, नाबालिग का रेप और नाबालिग के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का आरोपी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले को लाहौर अदालत ने भी बरकरार रखा था।

आरोपी अली को जनवरी में घटना के करीब दो हफ्ते बाद ही गिरफ्तार किया गया था। उसने 7 वर्षीय बच्ची का अपहरण करने के बाद उसके साथ रेप किया। इस घिनौने अपराध को करने के बाद उसने मासूम का शव कसूर शहर के एक कूड़ेदान में डाल दिया था। जैनब का अपहरण उसके रिश्तेदार के घर के पास से 4 जनवरी को हुआ था। इसके करीब 5 दिनों बाद उसका शव कूड़ेदन में मिला। आरोपी अली की गिरफ्तारी डीएनए टेस्ट के बाद हत्या से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद की गई थी।

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