थाईलैंडः मौत की गुफा में ऐसे गुजरे वो 17 दिन!

पूरी दुनिया करीब दो हफ्ते तक दम साधे बस एक खबर का इंतजार कर रही थी. थाईलैंड की गुफा में फंसे वो 13 लोग कैसे और कब ज़िंदा बाहर निकलेंगे? कहते हैं कि रूस में चल रहे फीफा वर्लडकप फुटबॉल मैच से कहीं ज्यादा नजर दुनिया भर के लोगों की इस गुफा पर थी. कई देशों की साझा कोशिशों के बाद सभी बच्चे अब उस गुफा से बाहर आ चुके हैं. आइए आज आपको बताता हूं कि आखिर ये बच्चे उस गुफा में फंसे कैसे. 17 दिन दिन तक गुफा में ज़िंदा कैसे रहे. क्या खाया-क्या पिया. और फिर किस तरह उन्हें मौत की उस गुफा से बाहर निकाला गया. तो पेश है मौत की उस गुफा में ज़िंदगी के 17 दिन की पूरी कहानी.

23 जून 2018, टैम लूंग गुफा, चियांग राय, उत्तरी थाईलैंड

थाईलैंड की वाइल्ड बोर्स अंडर-16 फुटबाल टीम ने तय किया था कि प्रैक्टिस मैच के बाद वो टैम लूंग गुफा देखने जाएंगे. मैच खत्म हुआ और टीम के 12 खिलाड़ी और उनके कोच तय प्रोग्राम के मुताबिक गुफा तक पहुंच गए. इसके बाद एक-एक कर सभी बच्चे करीब दस किलोमीटर लंबी गुफा में दाखिल होने लगते हैं. तब मौसम बिल्कुल साफ था.

अचानक बदला था मौसम का मिजाज

मगर इधर बच्चे गुफा में दाखिल होते हैं उधर मौसम का मिज़ाज अचानक बदल जाता है. बाहर के बिगड़े मौसम से बेखबर बच्चे गुफा में लगातार आगे बढ़ रहे थे. ऊबड़ खाबड़ सुरंग से होते हुए फुटबाल टीम सबसे पहले यहां पहुंची. गुफा के मुहाने से करीब 200 मीटर तक का ये रास्ता तब तक पूरी तरह सूखा हुआ था. 200 मीटर के बाद गुफा इतना संकरा हो जाता है कि एक वक्त में एक ही शख्स निकल सकता है. मगर चूंकि बच्चे थे, लिहाज़ा वो इसे आसानी से पार कर गए.

बाहर लगा था नो-एंट्री का बोर्ड

अब यहां से आगे का रास्ता जुलाई से लेकर नवंबर यानी बरसात के दौरान तक इतना खतरनाक हो जाता है कि इस गुफा में इस दौरान नो-एंट्री का बोर्ड लगा दिया जाता है. मगर तब पानी ना होने की वजह से बच्चे यहां से भी काफी अंदर तक घुस चुके थे. इस जगह पर आकर गुफा का आकार एक मीटर से भी कम हो जाता है. यानी इसे या तो झुककर या लेट कर ही पार किया जा सकता है. बच्चे इसे भी पार कर गए.

तंग हो गई थी सुरंग

हालांकि कुछ दूरी के बाद ये रास्ता फिर चौड़ा हो जाता है. मगर उसके फौरन बाद यानी पटाया बीच के नज़दीक सुरंग की सबसे तंग जगह आती है. उसे भी पार कर लें तो इस जगह पर आकर सुरंग की ऊंचाई करीब 10 मीटर से भी ज़्यादा हो जाती है. बच्चे अब तक गुफा में करीब 4 किमी अंदर तक जा चुके थे. और तभी ठीक उसी वक्त बाहर हो रही तेज बारिश का पानी गुफा में घुसना शुरू हो जाता है.

कोच ने लिया था गुफा में रुकने का फैसला

पानी का लेवल धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा था. अब मुश्किल ये थी कि इस मानसूनी बारिश के पानी के बीच इस गुफा निकलने के लिए वापस इतना लंबा सफर तय किया कैसे जाए. क्योंकि बच्चों को तैरना भी नहीं आता था. निकलने का रास्ता सिर्फ एक और उस पर भी पानी खतरे के निशान से ऊपर आ चुका था. लिहाज़ कोच ने ये तय किया कि जब तक हालात बाहर निकलने लायक नहीं हो जाते हैं, तब तक यहीं रुकेंगे. अब सभी बच्चे एक कोने में दुबक कर पानी उतरने का इंतजार करने लगते हैं. मगर हालात सुधरने के बजाए और खराब होते चले गए.

उधर, गुफा के बाहर काफी वक्त बीतने के बाद भी जब बच्चे अपने अपने घर नहीं लौटे तो मां-बाप की भी बेचैनी बढ़नी शुरू हुई. पहले अगल-बगल और फिर मैदान में ढूंढा गया. और जब कुछ पता नहीं चला तो आखिरकार पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

24 जून 2018

शुरुआती जांच लोकल पुलिस ने की और इस जांच में वाइल्ड बोर्स अंडर-16 फुटबाल टीम के खिलाड़ियों और उनके कोच की साइकिल टैम लूंग गुफा के नज़दीक पाई गई. साइकिल के मिलते ही ये समझने में देर नहीं लगी कि हो ना हो बच्चे इसी गुफा के अंदर फंसे हों. इतना ही नहीं बच्चों के गुफा के अंदर जाने के हाथ और पांव के निशान मिले जिससे ये बात और पुख्ता हो रही थी.

25 जून 2018

बच्चों के गुफा में फंसे होने की जानकारी लोकल पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशंस टीम को दी. टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. मगर दिक्कत ये थी कि बच्चों तक पहुंचा कैसे जाए. क्योंकि गुफा में और गुफा के नज़दीक काफी कीचड़ होने की वजह से वहां घुसना मुश्किल था.

26 जून 2018

अब तक तीन दिन बीत चुके थे. मगर बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल रहा था. लिहाजा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को सही तरीके से अंजाम देने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन से करीब एक दर्जन थाइ नेवी सील कमांडो को जोड़ लिया गया.

27 जून 2018

कोई ठोस नतीजा ना निकलता देख थाईलैंड सरकार ने ऑस्ट्रेलिया की मिलीट्री टीम और ब्रिटेन के गुफा विशेषज्ञों की मदद ली.

28 जून 2018

विदेशी टीमों के साथ थाईलैंड की कई और टीमें इस अभियान में शामिल की गईं. लेकिन बावजूद इसके अभी तक बच्चों का कोई पता नहीं चल सका था.

29 जून 2018

अब तक इस ऑपरेशन में दुनिया की कई टीमें और चीन के कुछ और एक्सपर्ट भी शामिल हो गए. ब्च्चों के गुफा में फंसे होने की खबर अब दुनिया भर में फैल चुकी थी.

30 जून 2018

पूरा हफ्ता बीत चुका था लेकिन बच्चों और उनके कोच की एक झलक तक नहीं मिली थी. समझ नहीं आ रहा था कि टैम लूंग गुफा में फंसी वाइल्ड बोर्स अंडर-16 फुटबाल टीम के सदस्य ज़िंदा भी हैं या नहीं. 9 दिन बीत चुके थे. गुफा के मुहाने पर मिले सबूतों को छोड़ दें तो अब तक ऐसी एक भी दूसरी निशानी नहीं मिली थी, जिनसे उनके ज़िंदा होने या ना होने के सबूत मिल पाते. अब हर गुजरते दिन के साथ उम्मीदें दम तोड़ती जा रही थीं. ऊपर से खतरा ये कि अगर बारिश हो गई तो फिर पूरी गुफा ही पानी से भर जाएगी. जिसके बाद कोई उम्मीद नहीं बचेगी. इसी उधेड़बुन के बीच तभी ठीक 9वें दिन गुफा से एक आवाज़ बाहर आती है.

पूरी गुफा पानी से लबालब भरी हुई थी. अब इसे पार करना सिर्फ एक्सपर्ट गोताखोरों के बस की बात थी. शायद इसीलिए बच्चों के नज़दीक ठीक इस जगह पर सबसे पहले ब्रिटेन के गुफा एक्सपर्ट जॉन वोलेंनथन पहुंचे. जिन्हें थाईलैंड सरकार ने खास इस मिशन के लिए बुलवाया था. यहां आकर जॉन ने चिल्लाकर पूछा. कोई है. जवाब आया. हां.. फिर पूछा गया आप कितने लोग हैं. गुफा के अंदर से आवाज़ आई ‘थर्टिन’. यानी तेरह.

1 जुलाई 2018

पूरे 9 दिन बाद गुफा के चार किमी अंदर फंसी इस फुटबाल टीम के कोच और नन्हें खिलाड़ियों ने किसी बाहरी आदमी की आवाज़ सुनी. 9 दिन बाद गुफा में फंसे 13 लोगों से पहली बार संपर्क हुआ. इसी के साथ ये बात भी पक्की हो गई कि गुफा में फंसे सभी बच्चों और उनके कोच अभी जिंदा हैं.

गुफा में 9 दिन ज़िंदा कैसे रहे बच्चे?

पानी से लबलबाती हुई गुफा से बच्चों को निकाला कैसे जाए जबकि उनमें से किसी को तैराकी नहीं आती.. ये बड़ा सवाल था. मगर उससे भी बड़ा सवाल ये था कि आखिर 9 दिन तक इस अंधेरी गुफा में 11 से 16 साल तक के बच्चे आखिर ज़िंदा कैसे रहे. खुद बच्चों ने बताया कि शुरुआती 9 दिन बहुत कठिन थे. किसी को कुछ नहीं पता था कि उनके साथ क्या होने वाला है. क्योंकि तब तक उन्हें ये भी नहीं मालूम था कि कोई उनके यहां होने के बारे में जानता भी है या नहीं.

कोच एकपोल ने छोड़ दिया था खाना

अंडर-16 फुटबाल टीम इस गुफा में यूं ही मस्ती करने के लिए घुसी थी. ज़ाहिर है उनके पास खाना-पानी नहीं था. और ऐसे में बिना खाए-पिए 9 दिन ज़िंदा रहना तकरीबन नामुमकिन. एक जुलाई से पहले ज़िंदा रहने के लिए बच्चों ने इस दौरान गुफा में सिर्फ पानी पिया. उनकी किस्मत अच्छी थी क्योंकि जब वो इस गुफा में घुसे थे तो वहां एक लड़के का बर्थडे मनाया गया था. और उनका छूटा हुआ स्नैक्स वहां मौजूद था. मगर ये स्नैक्स भी दो दिन में खत्म हो गया. इस दौरान इस फुटबाल टीम के कोच एकपोल ने कुछ भी खाने से इनकार कर दिया. ताकि बच्चों के लिए अधिक खाना बचाया जा सके. उसे अंदाज़ा था कि वो किसी बड़ी मुसीबत में फंस गया है.

बच्चों को कराया मेडिटेशन

कोच एकपोल को पता था कि बिना खाने के बच्चे ज़्यादा दिन तक ज़िंदा नहीं रह पाएंगे और इस बात का कुछ अंदाज़ा नहीं लग पा रहा था कि वो यहां से निकलेंगे कब. लिहाज़ा कोच ने बच्चों को मेडिटेशन कराना शुरू कर दिया. एकपोल कोच बनने से पहले एक साधु यानी मॉन्क थे. लिहाज़ा उन्हें मेडिटेशन और ऐसे हालात में ज़िंदा रहने की कला आती थी. कोच ने बच्चों को शरीर की ऊर्जा बचाने के तरीके सिखाए. और गुफा में रहने के दौरान उनकी हिम्मत बढ़ाते रहे.

9 दिन बाद मिला खाना और दवाएं

हालांकि जब तक गोताखोर उस जगह तक पहुंचे जहां बच्चे थे उनकी हालत खराब हो चुकी थी. खासकर कोच की जिसने इतने दिनों तक कुछ भी नही खाया था और उसका शरीर बेहद कमजोर हो चुका था. 9वें दिन जब गोताखोर उन तक पहुंच गए तब नौ दिन बाद पहली बार उन्हें खाना और दवाएं मिलीं.

रेस्क्यू ऑपरेशन से पहले सील कमांडो की मौत

अब बच्चों को बस किसी तरह गुफा से बाहर निकालना था. पर काम बेहद मुश्किल. क्योंकि गुफा पानी से भरी हुई थी और जगह बेहद तंग थी. ऊपर से बाहर मूसलाधार बारिश का खतरा लगातार बना हुआ था. बल्कि रह-रह कर अब भी बारिश हो रही थी. पर किसी भी कीमत पर बच्चों को बचाना था. लिहाजा दुनिया भर के महारथियों के साथ मिल कर गुफा से बच्चों को बाहर निकालने का सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी शुरू हो गई. मगर पहली कोशिश में ही रेस्क्यू ऑपरेशन को एक बड़ा धक्का तब लगा जब बचाव कार्य में शामिल एक सील कमांडो की गुफा में ऑक्सिजन की कमी की वजह से मौत हो गई.

बच्चों को बचाने की कोशिश

अब तक दो हफ्ते गुज़र चुके थे लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे अभी भी गुफा में ही फंसे हुए थे. थाईलैंड के चियांग राय प्रांत की गुफा के करीब चार किलोमीटर अंदर फंसे बच्चों और उनके कोच को निकालने के लिए थाईलैंड नेवी सील के कमांडो और विदेशी गोताखोरों की टीम ने दिन रात एक कर दिया. एक तरफ रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे लोग बच्चों को सुरक्षित निकालने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे. तो दूसरी तरफ गुफा में फंसे बच्चे के घरवाले दुआएं मांग रहे थे. पूरी दुनिया की सांस अटकी हुई थी.

8 जुलाई 2018

सबसे पहले गुफा के अंदर 2 किमी की दूरी पर इस जगह रेस्क्यू टीम का बेस बनाया गया. जहां ज़रूरी इक्वेपमेंट के साथ दवाएं और खाना स्टोर किया गया. क्योंकि इसके आगे का रास्ता थोड़ा खतरनाक था और यहां गुफा मोड़ भी ले रही है. इस पूरे रास्ते पर भारी बारिश की वजह से काफी गहरे तक पानी भरा हुआ था. जिसे एक अच्छा तैराक ही पार कर सकता था. इसके आगे गुफा का आकार कहीं संकरा तो कहीं चौड़ा है.

लिहाज़ा बच्चों को गुफा से निकालने से पहले उन्हें उसी जगह तैराकी की हल्की फुल्की ट्रेनिंग दी गई. ताकि वक्त पड़ने पर वो कम से कम पानी में हाथ पैर तो चला सकें. इसके बाद रविवार को पहली बार चार बच्चों को ऑक्सीज़न कैप्सूल के ज़रिए गुफा से सुऱक्षित बाहर निकाला गया. ये वो चार बच्चे थे जो सबसे ज्यादा कमजोर और बीमार थे.

9 जुलाई 2018

अंडर-16 फुटबाल टीम के 13 लोगों में से 4 बच्चों के बाहर निकलते ही उम्मीद की रोशनी जगमगा उठी. और अगले रोज यानी सोमवार को चार और बच्चों को निकाल लिया गया लेकिन फिर खराब मौसम की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन को मंगलवार तक के लिए रोकना पड़ा.

10 जुलाई 2018

मंगलवार को गोताखोरों और सील कमांडों ने एक बार फिर ऑपरेशन शुरू किया. रेस्क्यू टीम ने जैसा प्लान बनाया था, ठीक वैसा ही हुआ. एक-एक कर बाकी बचे चारों बच्चों और उनके कोच को पानी से भरी अंधेरी गुफा से बाहर निकाल लिया गया. पूरी दुनिया पल पल इस रेस्क्यू ऑपरेशन को देख रही थी.

थाईलैंड ही नहीं दुनिया के लिए भी ये जश्न का दिन था. बेहद मुश्किल हालात में सूझबूझ के साथ सभी जिंदगियों को बचा लिया गया. थाईलैंड के चियांग राय प्रांत के थाम लुआंग गुफा में फंसे सभी 13 लोगों के इस मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन की कामयाबी पर थाई नेवी सील्स ने फेसबुक पर लिखा कि हमें नहीं पता कि ये चमत्कार है, विज्ञान है या क्या है? सभी 13 वाइल्ड बोर्स अब गुफा से बाहर हैं.

नेवी गोताखोर समन गुनान की मौत

थाईलैंड की खौफनाक गुफा में जो मिशन नामुमकिन लग रहा था वो आखिरकार कामयाब रहा. 17 दिनों से गुफा में फंसे 12 बच्चों और उनके एक कोच को जब सुरक्षित बाहर निकाला गया तो पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली. थाई नेवी सील्स और 50 गोताखोरों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर बच्चों को तो बचा लिया. मगर इस कोशिश में एक पूर्व नेवी गोताखोर समन गुनान की जान चली गई.

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