हरिके झील तक पहुंचा जहरीला शीरा, पैदा हुआ कई दुर्लभ जीवों के लिए खतरा

ब्यास में फेंके गए शीरे का खतरा प्रमुख वेटलैंड हरिकेपत्तन तक भी पहुंच गया है, जिससे कई दुर्लभ जीवों की जान के लिए संकट पैदा हो गया है। गुरदासपुर में कीड़ी अफगाना स्थित चड्ढा शुगर मिल द्वारा ब्यास में फेंके शीरे से बड़ी संख्या में नदी में मौजूद मछलियों व अन्य जीवों की मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक शीरे वाला दूषित पानी हरिके पत्तन तक पहुंचा गया। वहां से कुछ दूषित पानी तो बहाव के साथ आगे निकल गया, कुछ हरिके झील में फंस गया है।

इसका निकलना बहुत मुश्किल है, क्योंकि यह पानी के बहाव में नहीं है। ऐसे में 49 वर्ग किलोमीटर बड़ी हरिके झील से दूषित पानी निकालना पर्यावरण विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। हरिके वेटलैंड में दुर्लभ कछुए, सांप, मछलियां, ऊदबिलाव, चिड़ियों समेत बड़ी संख्या में जीव हैं। 2007 में यहां डॉल्फिन भी दिखी थी। हालांकि वन्य जीव सुरक्षा विभाग का दावा है कि अब हरिके झील में डॉल्फिन नहीं हैं। विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि झील से दूषित पानी निकालना लगभग नामुमकिन है।

डॉल्फिन की तलाश जारी

ब्यास में शीरा फेंकने से जीवों की मौत के बाद से डॉल्फिन को लेकर रहस्य बरकरार है। ब्यास नदी में डॉल्फिन को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जाते रहे हैं। एक अनुमान था कि इनकी संख्या करीब 35 हैं लेकिन वन्य जीव सुरक्षा विभाग मानता है कि इनकी संख्या 11 तक हो सकती है। शीरे वाले मामले के बाद अब तक रविवार को डॉल्फिन का सिर्फ एक ही परिवार दिखा है। बाकी डॉल्फिन का कुछ पता नहीं चल सका है। विभाग की टीमें उनकी तलाश में लगी हैं।

वन्य जीव सुरक्षा विभाग ने ब्यास नदी में शीरा फेंकने के मामले में चड्ढा शुगर मिल्स के प्रबंधकों के खिलाफ बटाला अदालत में केस दायर किया था। सोमवार को अदालत ने केस की सुनवाई दो जून को करने के आदेश जारी किए हैं।हरिके झील में प्रदूषित पानी है, बहाव के साथ बीच वाला पानी तो निकल गया, इधर-उधर वाला रह गया। उसे निकलने में कुछ समय लगेगा। डॉल्फिन की एक फैमिली दिखी है, बाकी की तलाश जारी है।वन्य जीव सुरक्षा विभाग को पहले ही यह पता होना चाहिए था कि दूषित पानी हरिके तक जाएगा और झील में फंस सकता है। ऐसे में पहले ही उसे मोड़ कर खेत या बंजर जमीन में फेंकने का उपाय करना चाहिए था। इससे हरिके के दुर्लभ जीवों को खतरा हो सकता है।

ब्यास दरिया में जहरीले कचरे पर राज्यपाल ने मांगी रिपोर्ट

ब्यास दरिया में एक शुगर मिल द्वारा डाले गए हजारों टन जहरीले कचरे और उससे हुई जलीय जीवों की मौत का मामला राजभवन पहुंच गया है। पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से पूरे घटनाक्रम का ब्योरा देने को कहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भेजे पत्र में राज्यपाल ने मामले की पूरी जानकारी, दरिया के पानी और क्षेत्र के पर्यावरण को हुए नुकसान का ब्योरा देने को कहा है।

पत्र में लिखा गया है कि ब्यास दरिया का पानी पंजाब और राजस्थान के कई जिलों में पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इस गंभीर मामले में तुरंत आवश्यक कदम उठाए जाएं और हालात को काबू किया जाए। राज्यपाल ने पंजाब की नदियों में प्रदूषण के मुद्दे पर लंबी अवधि की योजनाएं तैयार करने को भी कहा है।

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