2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: राजा-कनिमोझी को बरी किए जाने के खिलाफ ED पहुंचा HC

प्रवर्तन निदेशालय( ईडी) ने 2जी घोटाले से जुड़े एक मामले में विशेष अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को चुनौती दी. विशेष अदालत ने 2 जी घोटाले से जुड़े इस मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा तथा द्रमुक सांसद कनिमोझी को बरी कर दिया था.

विशेष अदालत ने इन दोनों के साथ ही 17 अन्य लोगों को भी पिछले साल 21 दिसंबर को बरी किया. इनमें द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्माल, एसटीपीएल के शाहिद बलवा और विनोद गोयनका, कुसेगांव फ्रूट्स एंड वेजीटेबल्स के आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, फिल्म निर्माता करीम मोरानी तथा कलईगनार टीवी के निदेशक पी अमृतन और शरद कुमार शामिल है.

ईडी ने आरोप पत्र में कहा था कि एसटीपीएल ने डीएमके के चैनल कलाईगनार टीवी के प्रवर्तकों को 200 करोड़ रुपये से अधिक धन दिया था.

विशेष अदालत ने उसी दिन केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) के 2जी मामले में भी राजा और कनिमोझी समेत अन्य लोगों को बरी कर दिया था. सीबीआई का आरोप था कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं की वजह से सरकारी खजाने को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

क्या है मामला?
सीबीआई ने राजा, कनिमोझी और अन्य आरोपियों के खिलाफ अप्रैल 2011 में आरोप पत्र दाखिल किया था. सीबीआई ने आरोप लगाया था कि 122 लाइसेंस के आवंटन से 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. इसे दो फरवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था.

सीबीआई के दूसरे केस में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि रुइया और अंशुमन रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आई पी खेतान और एस्सार समूह के निदेशक (स्ट्रैटजी एंड प्लानिंग) विकास सरफ आरोपी बनाया गया था. सीबीआई कोर्ट में तीसरा आरोप-पत्र प्रवर्तन निदेशालय ने अप्रैल 2014 में 19 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया था.

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