फैसलाः लालू को अब तक 27.5 साल की सजा, अभी दो मामलों में फैसला आना बाकी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को चारा घोटाला के चार मामलों में कुल साढ़े 27 साल की सजा हो चुकी है। दो मामलों की सुनवाई अभी चल रही है और इनमें फैसला आना अभी बाकी है। उनको अब तक एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है।

देवघर कोषागार मामले में लालू को साढ़े तीन साल की सजा
चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में 23 दिसंबर 2017 को  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई और उनपर 5 लाख का जुर्माना लगाया गया था। इनके अलावा अन्य दोषी फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, बेक जूलियस, सुनील कुमार, सुशील कुमार, सुधीर कुमार और राजाराम को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई, जबकि उन पर पांच लाख का जुर्माना लगाया गया। आरसी 20ए-96 में पांच साल की सजा मिली थी

चारा घोटाला में राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद पर कुल छह केस चल रहे हैं. इनमें से एक आरसी-20 (चाईबासा ट्रेजरी से 37.5 करोड़ रुपये की निकासी) मामले में सीबीआई कोर्ट ने तीन अक्तूबर, 2013 को फैसला सुनाया था। इसमें लालू को पांच साल की सजा सुनायी गयी थी। 25 लाख रुपये का जुर्माना भी उन पर लगाया गया था। हालांकि, उसी साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। तब से लालू प्रसाद बेल पर थे।

चाइबासा कोषागार मामले में पांच साल की सजा मिली लालू को
लालू प्रसाद को सीबीआई की विशेष अदालत ने इस साल  23 जनवरी को चारा घोटाले के चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपये का गबन करने के मामले में पांच साल सजा सुनाई है। इसके साथ ही लालू यादव पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। लालू यादव के अलावा बिहार के ही पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को भी कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है।इसके अलावा कोर्ट ने ध्रुव भगत को तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा दी। अदालत ने विद्यासागर निषाद को तीन साल और जगदीश शर्मा को पांच साल कैद की सजा सुनायी। अदालत ने तीन पूर्व आईएएस फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, सजल चक्रवर्ती को चार-चार साल की कैद और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी। जुर्माना नहीं देने पर उन्हें तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

अभी दो मामलों में फैसला आना बाकी

चारा घोटाले के मामले में लालू प्रसाद पर सीबीआई ने छह मामले दर्ज किए थे। चार मामलों में उन्हें सजा हो गई है पर दो में फैसला आना बाकी है।

पशुपालन घोटाला यानी कोषागारों से फर्जी निकासी, दवा-चारा आदि की फर्जी आपूर्ति आदि मामलों में लालू प्रसाद पर छह केस दर्ज किए गए थे। इनमें चार मामलों आर सी 20/96, 64/96, 38ए और 68ए/96 में उन्हें सजा हो चुकी है।

जिनमें फैसला आना है- 

बिहार का मामला 
आरसी 63 ए/96 : भागलपुर और बांका कोषागार से 46 लाख 98 हजार रुपए की फर्जी निकासी से संबंधित मामले में सीबीआई ने लंबी जांच के बाद मार्च 2003 में आरोप पत्र दाखिल किया था। लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत 45 अभियुक्त इस केस में हैं। सीबीआई ने इनमें 268 गवाह और 514 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किया है। लंबी सुनवाई में कई गवाह व कुछ अभियुक्त मर गए और दो अभियुक्त सरकारी गवाह बन गए हैं। इस मामले में भी पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, पूर्व विधायक जगदीश शर्मा, आरके राणा, आईएएस अधिकारी बेक जूलियस, के. अरुमुगम आदि हैं।

झारखंड का मामला 
आरसी 47ए/96 : चारा घोटाला का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है। आरसी 47ए/96 में फैसला आना अभी बाकी है। डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ की फर्जी निकासी के मामले में लालू प्रसाद समेत कई महत्वपूर्ण लोग अभियुक्त हैं। इस केस में करीब 900 गवाह हैं। इस केस में भी लालू प्रसाद समेत कुछ अभियुक्तों को अधिकतम सात साल की कैद हो सकती है।

वर्ष 1996 में दर्ज हुआ था पहला केस 
लालू प्रसाद पर हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने पहला केस आरसी 20/96 27 मार्च 1996 को दर्ज किया था। इस केस के सूचक थे चाईबासा के तत्कालीन डीसी अमित खरे। वर्ष 94-95 की अवधि में चाईबास कोषागार से 37.79 करोड़ रुपए निकाल लिए गए थे। इस केस में पहली बार मुख्य अभियुक्त लालू को वीडिओ कांफ्ेंसिंग से सजा सुनायी गई। उन्हें धारा 409, 420, 467, 468, 471, 477, 201, 477ए, 511,120 और पीसी सेक्शन 13 के तहत अभियुक्त बनाया गया। लालू की पहली गिरफ्तारी 30.8.97 को हुई थी। उन पर एक मामला आय से अधिक संपत्ति अर्जन करने से जुड़ा था। सीबीआई ने केस दर्ज किया था पर उसे साबित नहीं कर पायी। बाद में लालू प्रसाद उसमें बरी हो गए।

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