दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला, AAP के 20 विधायकों की सदस्यता बहाल

आम आदमी पार्टी की सरकार को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। लाभ के पद मामले में अयोग्य ठहराए गए AAP के 20 विधायकों के मामले में कोर्ट ने चुनाव आयोग की सिफारिश को खारिज कर दिया है। साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि विधायकों की याचिका पर दोबारा सुनवाई हो। AAP की नेता अलका लांबा ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि सभी 20 विधायक बने रहेंगे, उन लोगों को मुंह की खानी पड़ी है जो सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे थे।
दरअसल, 19 जनवरी को चुनाव आयोग ने संसदीय सचिव को लाभ का पद ठहराते हुए राष्ट्रपति से AAP के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी। उसी दिन AAP के कुछ विधायकों ने चुनाव आयोग की सिफारिश के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया था। 21 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर करते हुए AAP के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी।
आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की 2 जजों की बेंच ने यह बड़ा फैसला सुनाया है। बताया जा रहा है कि कोर्ट में 15 से ज्यादा पूर्व विधायक भी मौजूद थे। गौरतलब है कि जनवरी में AAP विधायकों ने अपनी सदस्यता रद्द किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी इस मामले में फैसला आने तक उपचुनाव नहीं कराने का आदेश दिया था।

बाद में AAP विधायकों ने हाई कोर्ट में दायर की गई अपनी पहली याचिका को वापस लेकर नए सिरे से याचिका डाली और अपनी सदस्यता रद्द किए जाने को चुनौती दी। बता दें कि 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने वाले अविंद केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया था। उनमें से एक विधायक जरनैल सिंह भी थे जिन्होंने बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

विधायक जिनकी सदस्यता गई थी-

1. प्रवीण कुमार- जंगपुरा से विधायक थे। इन्हें शिक्षा मंत्री का संसदीय सचिव बनाया गया था।

2. शरद कुमार- नरेला से विधायक थे। इन्हें राजस्व मंत्री का संसदीय सचिव बनाया गया था।

3. आदर्श शास्त्री- द्वारका से विधायक थे। उन्हें सूचना-प्रौद्योगिकी मामलों के मंत्री का सचिव बनाया गया था।

4. मदन लाल- कस्तूरबा नगर से विधायक थे। इन्हें विजिलेंस मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

5. शिव चरण गोयल- मोती नगर से विधायक थे। इन्हें फाइनैंस मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

6. संजीव झा- बुराड़ी से विधायक थे। इन्हें ट्रांसपॉर्ट मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

7. सरिता सिंह- रोहतास नगर से विधायक थे। इन्हें एंप्लॉयमेंट मिनिस्टर का सचिव बनाया गया था।

8. नरेश यादव- मेहरौली से विधायक थे। उन्हें लेबर मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

9. राजेश गुप्ता- वजीरपुर से विधायक थे। उन्हें हेल्थ मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

10. राजेश ऋषि- जनकपुरी से विधायक थे। उन्हें हेल्थ मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

11. अनिल कुमार वाजपेयी- गांधी नगर से विधायक थे। उन्हें हेल्थ मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

12. सोम दत्त- सदर बाजार से विधायक चुने गए थे। वह इंडस्ट्रीज मिनिस्टर के संसदीय सचिव बनाए गए थे।

13. अवतार सिंह- कालकाजी से विधायक निर्वाचित हुए थे। उन्हें गुरुद्वारा चुनाव मामलों के मंत्री का संसदीय सचिव बनाया गया था।

14. विजेंदर गर्ग विजय- राजेंद्र नगर से विधायक थे। उन्हें PWD मिनिस्टर का संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था।

15. जरनैल सिंह- तिलक नगर से विधायक थे। उन्हें डिवेलपमेंट मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

16. कैलाश गहलोत- नजफगढ़ से विधायक थे। उन्हें लॉ मिनिस्टर का संसदीय सचिव बनाया गया था।

17. अलका लांबा- चांदनी चौक से विधायक चुनी गई थीं। उन्हें पर्यटन मंत्री का संसदीय सचिव बनाया गया था।

18. मनोज कुमार- कोंडली से चुनाव जीते थे। उन्हें खाद्य और नागरिक आपूर्ति मामलों के मंत्री का सचिव बनाया गया था।

19. नितिन त्यागी- लक्ष्मी नगर से विधायक चुने गए थे। उन्हें महिला और बाल एवं सामाजिक कल्याण मंत्री का संसदीय सचिव बनाया गया था।

20. सुखवीर सिंह- मुंडका से चुनाव जीते थे। उन्हें भाषा और SC/ST/OBC कल्याण मामलों के मंत्री का संसदीय सचिव बनाया गया था।

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