दिल्ली-एनसीआर में आज भी धूल ही धूल, यूपी में 10 की मौत

पश्चिम भारत की धूल भरी आंधी की वजह से दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। राजस्थान से चली धूल भरी आंधी की चपेट में दिल्ली, एनसीआर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाके आ गए हैं। वातावरण में धूल की परत छा गई है, जिसने वातावरण दमघोंटू बना दिया है। यहां आज भी हालात ठीक नहीं है। राजधानी में आंधी के कारण हवा में सूक्ष्म पीएम 10 कणों की बढ़ोतरी हुई है। आज गुरुवार  सुबह लोधी रोड इलाके में हवा की गुणवत्ता खराब स्तर पर बनी हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में भी धूल भरी आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। यहां कल की धूल भरी आंधी में दस लोगों की मौत हो गई।

आंधी की वजह से धूल भरी हवाएं अब भी राजस्थान से आ रही हैं, इसलिए कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रह सकती है। सिर्फ तूफान और बारिश ही इनसे राहत दिला सकते हैं, जिनके आसार तुरंत नहीं हैं। गुरुवार की सुबह पीएम 2.5 का स्तर 83 और पीएम 10 का स्तर 262 पर दर्ज किया गया। पीएम 10 अभी भी खराब स्तर पर बना हुआ है।  पीएम 10 का स्तर 200 के पार होते ही हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक नहीं रहती। दिल्ली एनसीअर में आलम ये है कि पीएम 10 का स्तर 200 से कहीं ज्यादा पहुंच चुका है। लोधी रोड इलाके में काफी पेड़-पौधे होने के बावजूद पीएम 10 का स्तर 200 से कहीं ज्यादा होना काफी चिंताजनक है। दिल्ली एनसीआर के बाकी कई इलाकों में ये स्तर और भी खराब बताया जा रहा है।

हालांकि, गुरुवार को हालात बुधवार से बेहतर दिखाई दिए लेकिन अभी भी हवा की गुणवत्ता सांस लेने लायक नहीं है। आपको बता दें कि बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबी से आई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर इलाके में पीएम 10 का स्तर 778 पर अत्यंत गंभीर से ऊपर था। दिल्ली में यह विशेषकर 824 पर था। इसी कारण धुंध की स्थिति बनी हुई थी, जिसका असर विजिबिलिटी पर भी पड़ा।

बुधवार को उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में धूल भरी आंधी चली। इस आंधी में 10 लोगों की मौत हो गई। जिसमें 3 लोग गोंडा, एक फैजाबाद और 6 लोग सीतापुर के शामिल हैं  धूल भरी हवाओं की रफ्तार कम है। यदि यह आंधी तूफान का स्वरूप लेती हैं, तो फिर यह धूल दूर तक उड़ जाएगी। दूसरा, बारिश होने से यह छंट सकती है। लेकिन अभी न तो आंधी-तूफान के आसार हैं और न ही बारिश के। इसलिए अगले दो दिनों तक इससे राहत के आसार नहीं दिख रहे।

हवा में धूलकण घुल गए हैं इसलिए इससे घुटन महसूस हो रही है। ज्यादा उम्र के लोगों और बीमारों के लिए यह खतरनाक है। जो लोग स्वस्थ हैं, उन्हें भी धूलकण नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूसरा, नुकसान यह है कि धूल की परत के कारण धरती के गर्म होने के कारण उत्पन्न होने वाला विकिरण ऊपर तक नहीं उठ पा रही है। नतीजा यह है कि रात का तापमान ज्यादा गर्म रहेगा। हालांकि, दिन में धूल की परत के कारण सूरज की सीधी चुभन कम है किन्तु गर्मी का अहसास ज्यादा हो रहा है। धूल से बचने के लिए मास्क पहनकर निकलना और घर में एयर फ्यूरी फायर इस्तेमाल किया जा सकता है।

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