राज्यसभा चुनाव: यूपी में यूं बना BJP का खेल और सपा-बसपा हो गई फेल

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए शुक्रवार को हुए मतदान और काउंटिंग किसी एक्शन थ्रिलर या टी-20 मैच सा रोमांचित करने वाला था. हर पल बदलते समीकरण, क्रॉस वोटिंग, अफवाहों का दौर और आरोप-प्रत्यारोप के बीच जीत के दावे. वो सब कुछ था जो हॉलीवुड की एक्शन थ्रिलर में देखने को मिलता है या फिर टी-20 क्रिकेट के रोमांचक मुकाबले में.

बीजेपी ने 10 में से 9 सीट जीतकर 14 मार्च को गोरखपुर और लोकसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद वापसी की. वहीं बसपा प्रत्याशी की हार के बाद मायावती और अखिलेश के बीच 2019 लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर भी अब सबकी निगाहें लग गई हैं.

दरअसल बसपा ने उपचुनाव में सपा प्रत्याशी को इसी शर्त पर समर्थन दिया था कि बदले में उनका एक उम्मीदवार उच्च सदन जाएगा. हालांकि ऐसा हो न सका. जोड़तोड़ के गणित में बीजेपी के अनिल अग्रवाल ने बसपा के भीमराव अम्बेडकर को हरा दिया. 21 मार्च को चाय और डिनर डिप्लोमेसी से शुरू हुआ संख्या जुटाने के दौर में बीजेपी के 8 और सपा के एक उम्मीदवार की जीत तो पक्की थी. लेकिन 10वें सीट पर बीजेपी समर्थित अनिल अग्रवाल के मैदान में उतरने से मुकाबला रोमांचक हो गया.

इसके बाद शुरू हुआ सियासी अंकगणित का खेल. इसकी शुरुआत हुई 21 मार्च से जब सपा ने अपने और अन्य निर्दलीय विधायकों को डिनर पर आमंत्रित किया. कोशिश थी परिवार में एका का सन्देश देना और निर्दलियों को अपने पाले में लाना.
इससे पहले बुधवार सुबह सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यालय में अपने विधायकों की मीटिंग बुलाई. इस बैठक में 46 (एक विधायक हरिओम यादव जेल में बंद हैं) की जगह 40 ही पहुंचे. चाचा शिवपाल भी नहीं पहुंचे. इसके बाद कहा जाने लगा कि चाचा शिवपाल अभी भी नाराज हैं. फिर खबर आई कि शिवपाल सैफई चले गए हैं और डिनर में भी शामिल नहीं होंगे. इस बीच बुधवार दोपहर खबर आई कि अखिलेश ने शिवपाल से बात की है और उन्हें लखनऊ बुलाया है. फिर कहा गया कि शिवपाल सैफई से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं.

शिवपाल के बाद सस्पेंस बने निर्दलीय राजा भैया
अखिलेश के सामने कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को भी अपने पाले में करना किसी चुनौती से कम नहीं थी. डिनर में उनके और बाबागंज से निर्दलीय विधायक विनोद सरोज के शामिल होने पर भी सस्पेंस बरकरार था. लगातार आ रही खबरों के बीच पता चला कि अखिलेश ने राजा भैया से फोन पर बातचीत की है और वे डिनर में शामिल होंगे. सपा के डिनर डिप्लोमेसी के बीच मुख्यमंत्री ने शाम चार बजे पार्टी और सहयोगी दल के विधायकों को अपने सरकारी आवास पर चाय के लिए आमंत्रित किया.

बुधवार शाम सात बजे से होटल ताज में यादव कुनबा और पार्टी विधायकों का जमावड़ा लगना शुरू हुआ. लेकिन सबकी निगाहें दो ही शख्स पर टिकी थी. सवाल एक ही था क्या शिवपाल और राजा आएंगे? हालांकि डिनर के परवान चढ़ते-चढ़ते शिवपाल भी पहुंचे. सपा संरक्षक मुलायम नहीं पहुंचे. कहा गया उनकी तबीयत नासाज़ है. अखिलेश ने चाचा का गर्मजोशी से स्वागत किया. बदले में चाचा ने भी सपा के दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा किया. इस बीच राजा भैया नहीं पहुंचे थे.

शिवपाल के निकलते ही दूसरे दरवाजे से राजा भैया की एंट्री हुई. राजा भैया का भी गर्मजोशी से स्वागत हुआ. इस दौरान राजा भैया कि सपा प्रत्याशी जया बच्चन के साथ लम्बी बातचीत हुई. यह एक साफ सन्देश था कि राजा मायावती से अपनी वर्षों पुरानी अदावत भूले नहीं हैं. वो वोट तो करेंगे लेकिन किसे?

वह क्षण भी आया जब राजा भैया ने अपना रुख साफ करते हुए कहा मैं अखिलेश के साथ हूं और रहूंगा. राजा के इस बयान से एक बात तो साफ़ हो गई कि उनका वोट सपा को जाएगा. लेकिन एक सवाल अभी खड़ा हो रहा था. वे किसे वोट करेंगे – जया बच्चन को या फिर बसपा के भीमराव अम्बेडकर को? बहरहाल फोटो सेशन के साथ डिनर डिप्लोमेसी का सुखद समापन हुआ.

22 मार्च को भी चला लंच और डिनर का दौर
बुधवार को हुए डिनर डिप्लोमेसी के बीच ही पता चला कि कांग्रेस ने गुरुवार को अपने विधायकों को लंच पर आमंत्रित किया है. मायावती ने भी शाम को विधायकों की बैठक और डिनर का आयोजन किया है. सपा के एमएलसी ने भी डिनर का आयोजन किया है, जिसमें मुलायम शिरकत करेंगे. गुरुवार को ही जेल में बंद बसपा के मुख़्तार अंसारी और सपा के हरिओम यादव को वोट डालने के लिए कोर्ट से इजाजत मिलने की खबर पहुंची. इस बीच सभी दलों द्वारा अपनी जीत के दावे किये जाते रहे. तभी खबर आई कि मायावती ने अखिलेश से उन नौ विधायकों की लिस्ट मांगी है जो बसपा को वोट करेंगे. एक बार फिर हलचल बढ़ी. कहा जाने लगा क्या कुछ गड़बड़ है? हालांकि सपा की तरफ से 9 विधायकों की लिस्ट भेजने की भी खबर आई.

अब बेसब्री से इंतजार था शाम का जब एक बार फिर डिनर डिप्लोमेसी की शुरुआत होनी थी. बसपा की बैठक में 19 में से 18 विधायकों के पहुंचने की खबर मिली. दरअसल बांदा जेल में बंद विधायक मुख़्तार ही नहीं पहुंचे. इस बीच मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर सभी पार्टी विधायकों और सहयोगी दलों के विधायकों को आमंत्रित किया. सबसे चौंकाने वाला वाकया होना अभी बाकी था. शाम आठ बजे करीब पता चला कि मुख़्तार अंसारी को हाई कोर्ट से वोट डालने की अनुमति नहीं मिली है. वहीं फिरोजाबाद के एडीजे प्रथम ने भी जेल में बंद सिरसागंज से सपा विधायक हरिओम यादव को वोट डालने की अनुमति नहीं दी है.

ऐसे बना-बिगड़ा पक्ष-विपक्ष का अंकगणित
अभी यह सब चल ही रहा था कि विपक्ष को एक और झटका लगा. रात करीब 10 बजे एक तस्वीर सामने आई. उन्नाव से बसपा विधायक बगावत करते हुए मायावती की बैठक की जगह सीएम योगी की शरण में जा पहुंचे. इसके अलावा निर्दलीय अमनमणि त्रिपाठी और सपा के विधायक नितिन अग्रवाल भी बीजेपी के पाले में चले गए. निषाद पार्टी के पंडित विजय मिश्रा पहले ही बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान कर चुके थे.

रात करीब 10 बजे हुए इस बड़े उलटफेर से एक बार विपक्ष का अंकगणित गड़बड़ाती नजर आई. अब अंकों के खेल में बीजेपी के पास कुल 329 विधायक हो गए. उसे अपने नौ उम्मीदवार जिताने के लिए 333 वोट चाहिए. यानी 4 विधायक ही कम थे. लिहाजा उम्मीदें क्रॉस वोटिंग पर टिकी गई. वहीं अगर विपक्ष की बात करें तो उनके विधायकों का आंकड़ा 76 से घटकर 71 रह गया. दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए 74 वोट का कोटा चाहिए. यानी तीन वोट कम थे. अब मुकाबला कांटे का नजर आने लगा. अंकों के जोड़तोड़ में रात गुजर गई.

क्रॉस वोटिंग ने बढ़ा दी नेताओं की धड़कनें
23 मार्च की सुबह नौ बजे विधानसभा के तिलक हॉल में वोटिंग शुरू हुई. सबसे पहले सपा के शिवपाल यादव ने वोट किया और दोनों प्रत्याशियों के जीत का दावा कर चले गए. इस बीच बीजेपी, सपा और कांग्रेस के नेता बयानबाजी करते रहे. तभी 10 बजकर 15 मिनट के करीब खबर आई कि राज्यसभा में पहली क्रॉस वोटिंग हो गई. उन्नाव के पुरवा से विधायक अनिल सिंह ने बीजेपी के पक्ष में वोट किया है.

अंतरात्मा की आवाज का चला जोर!
अनिल सिंह ने अंतरात्मा की आवाज सुनकर महाराजजी (योगी आदित्यनाथ) को वोट दिया है. इसके बाद नितिन अग्रवाल, अमनमणि, निषाद पार्टी के पंडित विजय मिश्रा ने भी बीजेपी को वोट दिया. हालांकि कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए इकठ्ठा वोट डाला. तभी एक और क्रॉस वोटिंग की खबर आई. कहा गया कि कांग्रेस के नरेन्द्र सैनी ने भी बीजेपी को वोट दिया है. खबर चलते ही सैनी का खंडन आया और उन्होंने कहा हार से डरी बीजेपी अफवाह फैला रही है.

यह सब कुछ चल ही रहा था, तभी सुबह 11.09 बजे राजा भैया के ट्वीट से खलबली मची. ट्वीट में लिखा था: “न मैं बदला हूं, न मेरी राजनैतिक विचारधारा बदली है, ‘मैं अखिलेश जी के साथ हूं,’ का ये अर्थ बिल्कुल नहीं कि मैं बसपा के साथ हूं.” इस ट्वीट से साफ़ था कि वे बसपा प्रत्याशी को वोट नहीं देंगे. तो क्या फिर जया बच्चन को देंगे. इसके बाद अखिलेश ने भी ट्वीट कर राजा भैया को समर्थन के लिए शुक्रिया किया. अब सवाल था कि राजा क्या सोच रहे हैं. वे वोट डालने भी नहीं आ रहे हैं. करीब सवा एक बजे उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस की और कहा मेरे ट्वीट से है सपा को वोट दूंगा. बसपा को नहीं.

इन सबके बीच एक बार फिर अफवाह फैली कि योगी के मंत्री ओमप्रकाश राजभर के सुहेलदेव भारत समाज पार्टी के दो विधायकों ने बसपा को वोट कर दिया है. एक बार फिर हलचल बढ़ी. हालांकि राजभर ने साफ़ कहा कि उनके चारो विधायकों ने बीजेपी को वोट दिया है. अभी रोमांच ख़त्म नहीं हुआ था.

करीब पौने तीन बजे राजा भैया मतदान करने पहुंचे. मतदान के बाद वे सीएम योगी से मिलने उनके कक्ष में गए. 20 मिनट चली इस मुलाकात ने एक बार फिर उत्सुकता बढ़ा दी. कहा जाने लगा क्या राजा अपने वादे से मुकर गए? मुलाकात के बाद राजा ने कहा विधायक होने के नाते मुख्यमंत्री से मिला. जो कहा था वही किया. हालांकि क्रॉस वोटिंग, अफवाह और सस्पेंस के बीच 4 बजे से पहले सभी 400 विधायकों ने अपने वोट डाल दिए.

वोटिंग के बाद क्या-क्या हुआ?
अब बारी थी पांच बजने की, जब काउंटिंग शुरू होती. पांच बजे काउंटिंग शुरू हुई. पौने छह बजे खबर आई है कि आपत्ति की वजह से चुनाव आयोग ने काउंटिंग रोक दी है. पता चला कि सपा और बसपा ने नितिन अग्रवाल और अनिल सिंह को अपना वोट पार्टी को बिना दिखाए डाले हैं. लिहाजा उन्हें अवैध घोषित किया जाए. यही नहीं सपा ने विपक्ष के चार बैलट पेपर फाड़े जाने की शिकायत की. आयोग ने तत्काल काउंटिंग रोकते हुए फुटेज मंगाए. करीब दो घंटे बाद चुनाव आयोग ने सपा और बसपा के आपत्तियों को खारिज करते हुए काउंटिंग शुरू की.

काउंटिंग दोबारा शुरू हुई तो बसपा और बीजेपी के एक-एक वोट अवैध घोषित किए गए. अब बेसब्री से इन्तजार था नतीजों का. खासकर 10वीं सीट के परिणाम का. रात साढ़े नौ बजे पहला परिणाम आया. बीजेपी के अरुण जेटली समेत चार उम्मीदवार जीत गए. उसके कुछ ही देर बाद खबर आई कि बीजेपी के आठ और सपा की जया बच्चन निर्वाचित घोषित हुई हैं. यह अपेक्षित था, फिर भी चौंकाने वाला. क्योंकि बीजेपी के सभी जीते उम्मीदवार को 39 वोट मिले थे जबकि जया बच्चन को 38 वोट ही मिले. अब बीजेपी की व्यूह रचना और राजा भैया के वोट की गुत्थी सुलझने लगी थी.

पौने दस बजे खबर आई 10वीं सीट के लिए प्रथम वरीयता में बसपा के भीमराव अम्बेडकर को 33 वोट मिले हैं और बीजेपी के अनिल अग्रवाल को 22 वोट मिले हैं. दोनों ही जीत के लिए 37 वोट के आंकड़े से दूर थे, लिहाजा दूसरी वरीयता की गिनती होनी थी. अब साफ़ हो गया कि अनिल अग्रवाल जीत गए. क्योंकि बीजेपी के पास विधायकों की संख्या ज्यादा थी. जीते हुए विधायकों के अतिरक्त वोट भी अनिल अग्रवाल के खाते में जुड़े.

रात 10.10 बजे अनिल अग्रवाल के जीतने की पुष्टि हुई और बीजेपी खेमा जश्न में जुट गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पार्टी मुख्यालय पहुंचे और जश्न में शामिल हुए. इस दौरान मुख्यमंत्री ने जहां जीते हुए उम्मीदवारों को बधाई दी. वहीं, अपने अंदाज में सपा-बसपा पर हमला भी किया. योगी ने कहा एक बार फिर साबित हो गया कि सपा अवसरवादी है, वह ले तो सकती है लेकिन दे नहीं सकती.

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