योगी सरकार की ई-टेंडरिंग मुहिम को तगड़ा झटका, खनन विभाग का सर्वर हैक, FIR

यूपी सरकार की खनन में ई टेंडरिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया का जवाब ठेकेदार और विभाग के लोग ई-धोखाधड़ी से दे रहे हैं. मिर्ज़ापुर और झांसी के खनन ठेकेदारों ने खनन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम एडमिनिस्ट्रेशन के सर्वर को हैक करके तय सीमा से 10 गुना ज़्यादा ई एमएम 11 फॉर्म निकाल लिए. इस हैकिंग से खनन विभाग को करोड़ों की चपत लगी है. मामले में साइबर फ्रॉड की एसटीएफ के साईबर थाने में एफआईआर दर्ज हुई है. सर्वर हैकिंग और ई-धोखाधड़ी ने सरकार की ई-टेंडरिंग और पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है.

सूबे में योगी सरकार बनने के बाद जुलाई 2017 में सरकार की नई खनन नीति आई. इस नीति में खनन पट्टों की नीलामी ई टेंडरिंग से शुरू की गई. खनन के बाद की प्रक्रिया, जिसमें खनिजों को लाने ले जाने के फॉर्म, जिसे एमएम 11 या रवन्ना भी कहते हैं, ऑनलाइन मिलने लगे. ठेकेदार को जितने खनिज क्षेत्र में खनन का पट्टा मिलता है, उसकी तादाद के मुताबिक ही ऑनलाइन एमएम 11 निकालने की व्यवस्था की गई. इसके पीछे मंशा थी कि जितनी तादाद के खनिज का पट्टा ठेकेदार को मिलता है, उतनी तादाद का ही फॉर्म एमएम 11 ऑनलाइन निकाला जा सकता है.

लेकिन सरकार की इस व्यवस्था की भी काट जालसाजों ने निकाल ली. मिर्ज़ापुर में 33 और झांसी में एक जगह पर धांधली की गई. कैसे हुई धांधली ये समझना होगा. पहले तो तय सीमा से ज़्यादा खनन किया गया, व्यवस्था के मुताबिक जितना खनन हुआ है, उतनी तादाद के एमएम 11 फॉर्म भी खनिज ले जाने के लिए लेने होंगें. बस जितनी फीस दी है, उससे ज़्यादा निकाले गए खनिज को ले जाने के लिए एमएम 11 फॉर्म निकाले गए. इसके लिए खनन विभाग के सॉफ्टवेयर मैनेजमेंट को देखने वाली सरकारी संस्था यूपीडेस्को के सर्वर से छेड़छाड़ कर एमएम 11 फॉर्म निकाले गए और खनिजों का लाया ले जाया गया.

चार महीने तक ये घालमेल चलता रहा लेकिन खनन विभाग और यूपीडेस्को को तीन दिन पहले ही इसकी जानकारी हुई. माना जा रहा है कि अबतक सरकार को करोड़ों के राजस्व की चपत लगाई गई है. राजधानी में एसटीएफ के साईबर थाने में यूपीडेस्को के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. अब खनन में ऑनलाइन घपला सामने आने पर विपक्षी दल भी सरकार को घेरने में लग गए हैं. सपा योगी सरकार को हर मकाम पर फेल बता रही है तो कांग्रेस को इस घपले में बीजेपी के लोगों का हाथ नज़र आ रहा है.

बता दें एनआईसी के स्टेट इनफार्मेशन ऑफिसर की ओर से उस संस्था यूपी डेस्को के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. जिसके पास खनन विभाग के डेटा एडमिनिस्ट्रेशन का काम है. इस एफआईआर में यूपीडेस्को को तो डेटा से छेड़छाड़ का आरोपी बनाया गया लेकिन उन खनन पट्टेदारों के नाम नहीं हैं, जिनको इस छेड़छाड़ से फायदा पहुंचा है. एफआईआर में इस बात का ज़िक्र नहीं है कि किन जगहों पर खनन तय सीमा से ज़्यादा हुआ और खनिज परिवहन ने लिए फर्ज़ी ऑनलाइन ई-एमएम 11 फॉर्म बनाए गए. जबकि अंदरखाने चर्चा है कि मिर्ज़ापुर की 33 और झांसी की एक खान में ये घपला हुआ है.

कहीं ऐसा तो नहीं कि ये घपला जितना बताया जा रहा है उससे भी कहीं ज्यादा है और पूरे प्रदेश में फैला है? फिलहाल जांच एसटीएफ के साईबर सेल के पास है, आगे की जांच में साफ होगा कि किस तरह सरकार की ई टेंडरिंग में भी खनन के खिलाड़ियों ने सेंध लगा ली है. गौरतलब है कि अखिलेश सरकार के दौरान हुए अवैध खनन की सीबीआई जांच चल रही है. खनन विभाग के मंत्री से अधिकारी सब सीबीआई के राडार पर हैं. सूबे में योगी सरकार ने काम संभालते ही खनन को बेदाग बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया. खुद सीएम योगी ने ये महकमा अपने पास रखा लेकिन ई टेंडरिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया को भेद कर घपलेबाजों ने पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है.

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