जयराम सरकार का बड़ा एक्शन, वीरभद्र सरकार में को-ऑपरेटिव बैंकों के चेयरमैन रहे तीन नेताओं पर होगी FIR

इन बैंकों में अनियमितताओं को लेकर ये एक्शन लिया जा रहा है। जिन कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई होगी, उनमें वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं हर्ष महाजन, जगदीश सिपहिया व शिवलाल का नाम शामिल है। यहां बता दें कि को-ऑपरेटिव बैंकों में भर्तियों व लोन बांटने के नाम पर गड़बड़ियों के आरोप हैं। हिमाचल प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक, कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक और स्टेट को-ऑपरेटिव, एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट, इन तीन बैंकों के चेयरमैन रहे कांग्रेस नेताओं को कार्रवाई का सामना करना होगा।
वीरभद्र सिंह के खास हर्ष महाजन स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन थे। जगदीश सिपहिया केसीसी व शिवलाल स्टेट को-ऑपरेटिव, एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट के चेयरमैन थे। भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए भर्तियों पर सवालिया निशान उठाए थे। आरोप है कि इसके अलावा इन बैंकों में से एक के प्रबंधन पर तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह के सुरक्षा अधिकारी के के बच्चों को भी नौकरी दी गई थी। यही नहीं, भर्ती के लिए परीक्षा भी तय नियमों को धता बताकर शिक्षा बोर्ड व यूनिवर्सिटीज के माध्यम से करवाई गई।
ऐसा माना जा रहा था कि इन बैंकों में गड़बडियों की भाजपा सत्ता में आते ही जांच के बाद कार्रवाई करेगी, लेकिन छह महीने के कार्यकाल के शुरूआती चरण में कुछ खास नहीं हुआ। अब जयराम सरकार ने इन तीन बैंकों के चेयरमैन रहे नेताओं पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार ने तीन कांग्रेस नेताओं सहित बैंक के अन्य बड़े पदों पर तैनात लोगों के खिलाफ भी एक्शन के संकेत दिए हैं।
सहकारिता विभाग ने इस मामले में गृह विभाग को पत्र लिखकर तीन नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई को कहा है। यही नहीं, सहकारिता विभाग ने पूर्व में इसी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व बाद में हिमाचल के मुख्य सचिव बने पार्थसारथी मित्रा व बैंकों के प्रबंध निदेशकों को भी एफआईआर में नामजद करने को कहा है। जयराम सरकार के इस फैसले के बाद से प्रदेश में सियासी पारा चढ़ जाएगा।
लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, ऐसे में ये मामला हिमाचल में चुनावी मुद्दा भी बनेगा। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार की इस कार्रवाई से पार्टी को नहीं डराया जा सकता। कांग्रेस नेताओं इंदद्रत लखनपाल, नंदलाल व विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है।
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