केजरीवाल मंत्रियों के साथ क्यों दे रहे हैं LG हाउस में धरना

नई दिल्ली ।  राजनिवास का धरना तो एक बहाना है, हकीकत यह है कि आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल इस धरने के जरिये तेजी से खिसक रही सियासी जमीन बचाने की कोशिश में जुटे हैं। धरने को जनता के लिए संघर्ष का नाम देकर इसे भुनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। गौरतलब कि धरने- प्रदर्शन के बीच ही आप का जन्म हुआ और धरने कर करके ही पार्टी नेताओं ने जनता को यह विश्वास दिलाया कि यही पार्टी है जो सियासत और दिल्ली की रंगत दोनों बदल सकती है। दिल्ली की जनता ने आप को सत्ता सौंप दी। लेकिन, साढ़े तीन साल के कार्यकाल में अपने 70 सूत्रीय घोषणा पत्र के सात वादे भी यह सरकार पूरे नहीं कर सकी है।

नतीजा यह कि जनता का इस पार्टी एवं इसके नेताओं दोनों से मोह भंग हो रहा है। केवल दिल्ली में ही सत्ता पा पाने में कामयाब रही आम आदमी पार्टी की सियासी जमीन दिल्ली में ही तेजी से खिसक रही है। दिल्लीवासी कांग्रेस के शासन को लगातार याद कर रहे हैं, इसीलिए कांग्रेस का मत फीसद नौ से बढ़कर 26 हो गया है जबकि आप का 56 से घटकर 26 पर आ गया है। गत वर्ष 272 वार्डों के लिए हुए नगर निगम चुनावों में आप को केवल 49 सीटें ही मिल पाईं। इसी तरह विधानसभा चुनाव में जीती हुई राजौरी गार्डन सीट भी उपचुनाव में चली गई। सिर्फ बवाना विधानसभा सीट पर ही पार्टी उपचुनाव में पार्टी अपनी इज्जत बचा सकी थी।

कनार्टक और गोवा में पार्टी का खाता ही नहीं खुला तो पंजाब में शाहकोट का चुनावी नतीजा बहुत कुछ बयां कर देने के लिए काफी है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक केजरीवाल ट्वीट में सच ही लिख रहे हैं कि उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। 2019 के लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है तो विधानसभा चुनाव भी अब बहुत दूर नहीं है। ऐसे में पार्टी इस तरह धरने-प्रदर्शन कर जनता को यह भरोसा दिलाने में जुट गई है कि वह तो जनता के लिए काफी कुछ करना चाहती है, लेकिन केंद्र सरकार, उपराज्यपाल एवं अधिकारी उनकी राह में निरंतर बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

यही वजह है कि राजनिवास के प्रतीक्षालय में बैठकर भी केजरीवाल और उनके सहयोगी मंत्री सिर्फ धरना नहीं दे रहे बल्कि सोशल मीडिया के जरिये पूरी राजनीति कर रहे हैं। सोमवार देर से ही वाट्सएप पर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के ट्वीट संदेशों के साथ AAP कार्यकर्ताओं को राजनिवास बुलाने का न्योता देना शुरू कर दिया गया था। मंगलवार को केजरीवाल के सरकारी आवास के बाहर बाकायदा टेंट लगाकर धरना शुरू भी कर दिया गया। बुधवार को यहीं से राजनिवास तक मार्च करने का कार्यक्रम भी बनाया गया है  धरने   को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का कहना है कि हम तो लगातार यह कह ही रहे हैं आप सरकार पूरी तरह से फ्लॉप हो गई है। वह जनता के बीच जाने लायक ही नहीं बची है, इसीलिए इस तरह के प्रपंच रच रही है।

नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता की मानें तो आप सरकार लगातार और अधिकारों की मांग कर रही है, लेकिन जो अधिकार मिले हुए हैं, उनका उपयोग नहीं कर पा रही। बिजली, पानी, प्रदूषण, परिवहन, सड़कों तक की समस्याओं तक से जनता को राहत नहीं दिला सकी है। ऐसे में अपनी कमी का ठीकरा अब उपराज्यपाल, केंद्र सरकार और अधिकारियों के सिर फोड़ने में लगी है।  वहीं, दिल्ली सरकार को इस मोर्चे पर एक झटका भी लगा है। दरअसल, राजनिवास पर मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के धरने को लेकर दिल्ली प्रदेश भाजपा ने ट्विटर पर एक सर्वे कराया जिसमें 95 फीसद लोगों ने अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग की। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का कहना है कि चुनावी वादे पूरा करने और जनसमस्याएं हल करने में आम आदमी पार्टी की सरकार पूरी तरह से विफल रही है। भाजपा इन मुद्दों पर उन्हें खुली बहस की चुनौती देती है। पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बुधवार को मुख्यमंत्री से इन मुद्दों पर चर्चा के लिए शहीदी पार्क में धरना देंगे।

दिल्ली प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि राजनिवास में मुख्यमंत्री व मंत्रियों का धरना सुनियोजित है। पानी, बिजली, अस्पताल, शिक्षा, अनधिकृत कालोनियों के नियमितिकरण जैसे मुद्दे पर यह सरकार विफल रही है। केजरीवाल सरकार ने अगर कोई काम किया है तो वह है लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं मोहल्ला क्लीनिक में भ्रष्टाचार, राशन विभाग में हेराफेरी और महिलाओं का उत्पीड़न। आज जब जनता मुख्यमंत्री से इन मुद्दों व उनके वादों पर जवाब मांग रही है तो वह उपराज्यपाल व अधिकारियों के साथ टकराव बढ़ा रहे हैं। उनका पूर्ण राज्य का मुद्दा तो एक बहाना है, असली मकसद दिल्ली की समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाना है।

उन्होंने कहा कि अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए राजनिवास में धरने का जो नाटक सोमवार शाम से चल रहा है वह जनवरी, 2014 राजपथ पर दिए गए धरने की पुनरावृत्ति है। उस समय अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए लोकपाल को मुद्दा बनाया गया था और आज पूर्ण राज्य व अधिकारियों से टकराव को बहाना बनाया गया है। लेकिन, अब उन्हें जनता के मुद्दों पर जवाब देना होगा। प्रदेश भाजपा महामंत्री कुलजीत चहल ने ट्विटर पर जो सर्वे कराया है उसमें भी लोगों की नाराजगी सामने आ गई है।

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