कांग्रेस कार्यसमिति का चुनाव नहीं मनोनयन होगा, राहुल को दिया गया अधिकार

नई दिल्ली। कांग्रेस की शीर्ष नीति नियामक इकाई कांग्रेस कार्यसमिति का सीधे चुनाव नहीं होगा बल्कि सदस्यों का मनोनयन होगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नई कार्यसमिति का गठन करेंगे। पार्टी के प्लेनरी महाधिवेशन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राहुल को कार्यसमिति के सदस्यों को मनोनीत करने का पूरा अधिकार दे दिया। हालांकि प्लेनरी का यह प्रस्ताव कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की लंबे समय से वकालत करते रहे राहुल के राजनीतिक नजरिये से अलग है और इससे साफ है कि कांग्रेस के नए अध्यक्ष भी पार्टी की पुरानी परिपाटी को बदल नहीं पाए हैं।

नये अध्यक्ष के कमान संभालने के बाद कार्यसमिति के सदस्यों के चयन की अनिवार्यता की बात मंच से गुलाम नबी आजाद ने उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के 133 साल के इतिहास में केवल आधा दर्जन मौके पर ही कार्यसमिति के लिए चुनाव हुए हैं। उनका कहना था कि अधिकांश समय पार्टी अध्यक्ष को ही सदस्यों को नामित करने का अधिकार दिया गया है।

आजाद का इतना कहना भर था कि प्लेनरी में मौजूद हजारों कांग्रेसी राहुल को इसके अधिकार देने की आवाज बुलंद करने लगे। इस पर आजाद को भी कहना पडा कि जो आप कह रहे हैं उसी बारे में उनका प्रस्ताव है। इसके बाद आजाद ने कार्यसमिति के मनोनयन का अधिकार राहुल गांधी को देने संबंधी प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से तत्काल पारित कर दिया गया।

गौतरलब है कि राहुल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र लाने और जमीन से जुडे़ लोगों के लिए उन्हें शीर्ष निर्णय प्रक्ति्रया का हिस्सा बनाने की जरूरत पर बल देते रहे हैं। कांग्रेस महासचिव के तौर पर युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के संगठन चुनाव कराकर राहुल ने इसका आगाज भी किया। मगर यह पहल इससे आगे नहीं बढ़ पायी। कांग्रेस कार्यसमिति का आखिरी बार चुनाव 1997 में सीताराम केसरी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कोलकाता के महाधिवेशन में हुआ था।

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