जांच कमेटी ने CM योगी को सौंपी रिपोर्ट, 7 अधिकारियों को माना आरोपी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने वाराणसी फ्लाईओवर हादसे में राज्य सेतु निगम के 7 अधिकारियों को आरोपी माना है। जिनमें प्रबंध निदेशक से सहायक परियोजना प्रबंधक शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वाराणसी में मंगलवार को निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने से मरे 18 लोगों के कारणों की जांच के लिए गठित 3 सदस्यीय कमेटी ने गुरुवार रात अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है जिसमें सेतु निगम के 7 अधिकारियों को हादसे के लिए जिम्मेदार माना है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार इन आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर विचार कर रही है और इसके बाद इनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। वाराणसी जिला प्रशासन पहले ही अधिकारियों एवं घटनास्थल पर कार्य कर रही एजेन्सी के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304,308 एवं 427 तहत एफआईआर करा चुका है। प्रदेश कृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित कमेटी ने हादसे के लिए मुख्य रूप से 6 बड़े कारण माने हैं जिनकी वजह से यह दुर्घटना हुई। इस कमेटी में सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता भूपिन्द्र शर्मा एवं जल निगम के प्रबंध निदेशक राजेश मित्तल 2 सदस्य शामिल हैं।
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कमेटी ने इन 7 अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशानात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। इनमें सेतु निगम के प्रबंध निदेशक राजन मित्तल, मुख्य परियोजना प्रबंधक एस सी तिवारी, पूर्व परियोजना प्रबंधक गेन्दालाल, परियोजना प्रबंधक के आर सूदन, सहायक परियोजना प्रबंधक राजेन्द्र सिंह एवं कनिष्ठ परियोजना प्रबंधक राजेश पाल एवं लालचंद शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि इनमें से अंतिम 4 अधिकारी हादसा होने के बाद मंगलवार को ही निलम्बित किए जा चुके हैं जबकि निगम के प्रबंध निदेशक राजन मित्तल को गुरुवार को पद से हटा दिया गया है।

कमेटी ने पाया कि निर्माण के लिए उपयोग किया जा रहा मानचित्र संबंधित विभाग से अनुमोदित नहीं था। इसके अलावा दो कॉलमस के बीच रखा गया बीम भी क्रॉस बीम से बंधा हुआ नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य पुल निगम ने बीम निर्माण में इस्तेमाल सीमेन्ट, बालू एवं रोड़ी का अनुपात का रिकार्ड भी मिश्रण प्लांट पर नहीं रखा और मानकों के अनुरूप समय समय पर अधिकृत अधिकारी द्वारा इसकी जांच भी नहीं की।  प्लांट पर मिश्रण करने वाली यूनिट ने भी चेक लिस्ट तैयार नहीं की।

कमेटी ने आगे कहा कि निरीक्षण के बाद कोई रिमार्क भी नहीं किया गया। कमेटी के सामने सबसे महत्वपूर्ण तथ्य आया कि निर्माण स्थल पर एजेन्सी ने कोई बेरिकेटिंग नहीं कराया और न ही यातायात के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भविष्य में निर्माण स्थल पर इस प्रकार की प्रदेश में और घटना नहीं हो यह सुनिश्चित किया जाए। इस बीच सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस हादसे के तकनीकी पहलुओं की जांच के लिए एक और कमेटी का गठन किया है। यह 3 सदस्यीय कमेटी 15 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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