अविश्वास प्रस्ताव पर शिवसेना बैकफुट पर, दोनों सदन कल तक के लिए स्थगित

नई दिल्लीः आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज की मांग को लेकर तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और वाईएसआर कांग्रेस तथा तेलंगाना में आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के भारी हंगामे के कारण आज लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। तेदेपा और वाईएसआर कांग्रेस आज मोदी सरकार के खिलाफ अपना अविश्वास प्रस्ताव लाने पर पूरा जोर दिया लेकिन हंगामे के चलते इस पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

अविश्वास प्रस्ताव पर शिवसेना बैकफुट पर
शिवसेना इस मामले पर बैकफुट पर आ गई है। शिवसेना ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर अभी उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया इसलिए केंद्र के खिलाफ वोटिंग का अभी सवाल ही नहीं उठता। दूसरी तरफ गृहमंत्री राजनाथ सिह ने कहा कि विपक्ष सदन की कार्रवाई नहीं चलने देना चाहती। आज 11वें दिन भी सदन में न तो प्रश्नकाल हो पाया और न ही अन्य मुद्दों पर चर्चा हो पाई। उन्होंने कहा कि हम अविश्वास प्रस्ताव के लिए तैयार हैं।

राज्यसभा भी स्थगित
आंध्रप्रदेश और कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन करने के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने आज राज्यसभा में भारी किया गया जिसके कारण सदन की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह से बजट चरण सत्र के दूसरे चरण में लगातार 11 दिन तक सदन में कोई कामकाज नहीं हुआ। सभापति एम वेंकैंया नायडु ने सुबह सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए मंत्रियों को जरूरी विधायी कागजात पटल पर रखने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने शून्यकाल आरंभ करने का प्रयास किया तो तेलुगू देशम पार्टी, कांग्रेस और द्रमुक तथा अन्नाग्रमुक के सदस्य अपनी अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए सभापति के आसन के समक्ष आ गए। कुछ सदस्यों ने अपने हाथो में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे। इस पर नायडु ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लोग हंस रहे हैं और सदन में आपका बर्ताव मजाक का विषय बन जाएगा। यह देश और संसद के हित में नहीं है।

सरकार सदन में बहस कराने के लिए तैयार है लेकिन सदस्यों ने सभापति की बातों पर ध्यान नहीं दिया और वे हंगामा करते रहे। सदन में अराजकता की स्थिति देखते हुए नायडु ने पांच मिनट के अंदर ही कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। वाईएसआर कांग्रेस और तेदेपा ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दे दिया है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सदन में विश्वास स्थापित करने के लिए उनके पास पर्याप्त सदस्य हैं।

उल्लेखनीय है कि अविश्वास प्रस्ताव नोटिस के लिए सदन में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन चाहिए। सरकार ने भरोसा जताया है कि नोटिस स्वीकार कर लिए जाने पर भी लोकसभा में उसकी संख्या बल के कारण प्रस्ताव औंधे मुंह गिर जाएगा। लोकसभा में मौजूदा सदस्यों की संख्या 539 है और सत्तारूढ़ भाजपा के 274 सदस्य हैं। यह बहुमत से अधिक है और पार्टी को कई घटक दलों का समर्थन भी है।

Print Friendly, PDF & Email

You May Also Like

   

     

     
error: Content is protected !!