अब चीन बना रहा है बारिश का सबसे बड़ा नेटवर्क…

दुनिया भर में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है. ऐसे में चीन एक ऐसे विशाल नेटवर्क

पर काम कर रहा है जो बादलों का आकर्षित करने का काम करेगा.

 मोबाइल नेटवर्क तो पुराना हो गया, चीन अब एक बारिश का नेटवर्क तैयार कर रहा है. यह सिर्फ लफ्फाज़ी नहीं है. चीन को पानी की जरूरत है और इसलिए यह देश बारिश का ऐसा नेटवर्क बना रहा है जो स्पेन के साइज़ से तीन गुना बड़ा है. चीन एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है जो मौसम में बदलाव लाने का काम कर सकती है. इसका उद्देश्य एशिया के सबसे बड़े ताजा पानी के संग्रह तिब्बती पहाड़ों पर और अधिक बारिश लाया जाना है. यह तकनीक जितनी ताकतवर है, इसे उतना ही कम लागत वाला बताया जा रहा है.

इस सिस्टम में कई ऐसे ईंधन से सुलग रहे चैंबरों का नेटवर्क होगा जिन्हें ऊंचे तिब्बती पहाड़ों पर स्थापित किया गया है. अनुमान है कि इन चैंबरों की मदद से इलाके में बारिश 1000 करोड़ क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष बढ़ेगी. यानि चीन के कुल पानी के उपभोग का 7 प्रतिशत.

ऐसे हजारों चैंबरों को तिब्बती पहाड़ों की चुनिंदा जगहों पर बनाया जाएगा, ताकि स्पेन से तीन गुना बड़े इस इलाके में बारिश हो सके. यह इस तरह का दुनिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होने वाला है.

 इन चैंबरों में ठोस ईंधन को जलाया जाता है ताकि सिल्वर आयोडाइड पैदा हो सके. यह बर्फ के जैसा दिखने वाला पदार्थ क्लाउड सीडिंग यानि बादलों को नीचे लाने का काम करता है. यह चैंबर पहाड़ों पर दक्षिण एशिया से आने वाले नमी से भरे मॉनसून का सामना करने के लिए खड़े होंगे. जैसे ही हवा पहाड़ों से टकराएगी, एक ऊपरी झोंका इन कणों को बादलों की ओर उछालेगा ताकि बर्फ और बारिश होने लगेगी.

चीनी अखबारों में प्रकाशित जानकारी की मानें तो अभी तक 500 बर्नर तिब्बत की पहाड़ियों पर स्थापित कर दिए गए हैं. लेकिन फिलहाल यह प्रयोगात्मक स्तर पर ही हैं. इस सिस्टम को चीनी सरकार के एयरोस्पेस साइंस एंड टैक्नॉलोजी कोर्पोरेशन द्वारा संचालित किया जा रहा है. वैसा बारिश को खींचने के लिए इस तरह का प्रयोग करने वाला चीन पहला देश नहीं है. अमेरिका ने भी ऐसे प्रयोग किए हैं लेकिन चीन जिस स्तर पर इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, इस वजह से उसकी चर्चा ज़ोरों पर हैं.

इसके अलावा बादलों को नीचे लाने के लिए प्लेन, ड्रोन और अन्य साधनों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है ताकि मौसम में बदलाव ला पाने के इस सिस्टम के प्रभाव को अधिकतम किया जा सके.

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