एफएसडीए का बड़ा खुलासा, हजारों नकली थ्रोम्बोफोब ट्यूब बाजार में खपाने की आशंका
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में सामने आया है कि प्रतिष्ठित कंपनी की थ्रोम्बोफोब आइंटमेंट (20 ग्राम) के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर हजारों ट्यूब बाजार में खपाने की साजिश रची गई। मामले में चार कारोबारियों की भूमिका सामने आने पर औषधि निरीक्षक ने अमीनाबाद थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
एफएसडीए के अनुसार, अमीनाबाद स्थित शिव शक्ति फार्मा ने थ्रोम्बोफोब आइंटमेंट की 48,960 ट्यूब खरीदने के बिल प्रस्तुत किए थे। दावा किया गया कि दवाएं चिनहट स्थित महाराजा इंटरप्राइजेज से खरीदी गई थीं। बाद में 24 हजार ट्यूब वापस करने का डेबिट नोट भी पेश किया गया।
सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
जब विभाग ने बिलों का सत्यापन किया तो पूरा मामला संदिग्ध पाया गया। जांच टीम महाराजा इंटरप्राइजेज के पते पर पहुंची तो वहां फर्म बंद मिली। न कोई बोर्ड मिला और न ही कोई संचालक मौजूद था। नोटिस भेजने के बावजूद संचालक रत्नेश कुमार ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद सितंबर 2025 में महाराजा इंटरप्राइजेज और शिव शक्ति फार्मा दोनों के औषधि लाइसेंस निरस्त कर दिए गए।
एक-दूसरे पर डालते रहे जिम्मेदारी
जुलाई 2026 में निर्माता कंपनी से दोबारा शिकायत मिलने पर जांच तेज हुई। पूछताछ के दौरान रत्नेश कुमार, अविनाश चौधरी और ऋषभ कश्यप एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। रत्नेश कुमार ने खुद को केवल डमी प्रोपराइटर बताते हुए कहा कि वह कुछ पैसों के लालच में लाइसेंस धारक बना था, जबकि पूरा कारोबार सनी कश्यप और ऋषभ कश्यप संचालित करते थे।
रत्नेश ने यह भी दावा किया कि उसकी फर्म का लैपटॉप और बिलिंग सॉफ्टवेयर दूसरे लोग इस्तेमाल करते थे तथा भुगतान का पूरा नियंत्रण भी उन्हीं के पास था। वहीं ऋषभ कश्यप ने करीब 10 लाख रुपये नकद में दवाएं खरीदने और 24 हजार ट्यूब वापस करने की बात कही, लेकिन बैंक रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
बाजार में अब भी हो सकती हैं नकली दवाएं
एफएसडीए की जांच में सामने आया कि चारों आरोपियों ने मिलकर सॉफ्टवेयर के जरिए कूटरचित बिल तैयार किए और नकली दवाओं के भंडारण व बिक्री का संगठित नेटवर्क तैयार किया। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन 24 हजार ट्यूब को वापस दिखाया गया, उनका कोई भौतिक रिकॉर्ड या मूवमेंट नहीं मिला। दवा की एक्सपायरी जुलाई 2027 तक होने के कारण आशंका है कि ये नकली दवाएं अभी भी बाजार में मौजूद हो सकती हैं।
एफएसडीए ने रत्नेश कुमार, अविनाश चौधरी, ऋषभ कश्यप और सनी कश्यप के खिलाफ संगठित अपराध, धोखाधड़ी, कूटरचना और जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने सहित बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की है। अमीनाबाद थाना प्रभारी ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
फर्जी फर्म उपलब्ध कराने वालों की भी होगी जांच
पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने फर्जी फर्मों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराए। जांच एजेंसियों का मानना है कि इससे नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
ऐसे शुरू हुई कार्रवाई
एफएसडीए ने 8 और 9 जुलाई 2026 को पुलिस के साथ अमीनाबाद स्थित एक अवैध गोदाम पर छापा मारकर करीब 21 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं बरामद की थीं। 27 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए, जबकि शेष दवाओं को सील कर दिया गया। जांच का दायरा बाद में बख्शी का तालाब और गोंडा तक बढ़ा, जहां अवैध दवा भंडारण के मामले सामने आए। जांच में राजस्थान से जुड़े नेटवर्क के भी संकेत मिले, जिसके बाद फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाओं की सप्लाई का पूरा रैकेट उजागर हुआ।
आवाज प्लस अपील
यदि आपके क्षेत्र में नकली दवाओं की बिक्री, अवैध मेडिकल स्टोर या जनहित से जुड़ी कोई सूचना है, तो आवाज प्लस को भेजें।
📞 व्हाट्सएप: 93356 93356
💬 टिप्पणियां
अपनी टिप्पणी दें
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें