AWAZ PLUS | नोएडा/ग्रेटर नोएडा
नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र के बिजली विभाग में एक 5 MVA पावर ट्रांसफार्मर के फुंकने के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति के नुकसान के बाद वास्तविक कारणों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित रूप से मनगढ़ंत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कराकर पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया।
सूत्रों के अनुसार, जून माह में धूम मानिकपुर विद्युत उपकेंद्र पर स्थापित 5 MVA क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना से सरकार को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान होने की बात कही जा रही है। ऐसे मामलों में सामान्यतः उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कर यह निर्धारित किया जाता है कि ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग, रखरखाव में लापरवाही अथवा अन्य तकनीकी कारणों से क्षतिग्रस्त हुआ।
'वाइंडिंग लूज़' की रिपोर्ट पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा विवाद उस तकनीकी रिपोर्ट को लेकर है, जिसमें कथित तौर पर यह निष्कर्ष दिया गया कि ट्रांसफार्मर "कोर असेंबली में वाइंडिंग लूज़" होने के कारण फुंका।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वास्तव में ऐसी टिप्पणी रिपोर्ट में दर्ज की गई है, तो यह अपने आप में गंभीर जांच का विषय है। उनका दावा है कि ट्रांसफार्मर के भीतर वाइंडिंग की वास्तविक स्थिति का पता केवल सामान्य ऑन-साइट परीक्षण से नहीं लगाया जा सकता।
विशेषज्ञों का दावा— बिना De-tanking ऐसी जांच संभव नहीं
वरिष्ठ विद्युत अभियंताओं और तकनीकी जानकारों के अनुसार, किसी भी पावर ट्रांसफार्मर की कोर असेंबली एवं वाइंडिंग की स्थिति जानने के लिए ट्रांसफार्मर का तेल निकालकर उसे डी-टैंक (De-tanking) करना पड़ता है। इसके बाद फैक्ट्री स्तर पर वाइंडिंग निकालकर विस्तृत निरीक्षण एवं आवश्यक परीक्षण किए जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह पूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो केवल ऑन-साइट टेस्टिंग के आधार पर "वाइंडिंग लूज़" जैसा निष्कर्ष देना तकनीकी रूप से सवालों के घेरे में आता है।
'सिंडिकेट' पर संरक्षण देने के आरोप
मामले से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और कथित रूप से उनसे जुड़े लोगों ने जिम्मेदारी तय होने से बचने के लिए जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोप यह भी है कि इससे वास्तविक कारणों की पहचान नहीं हो सकी और करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति के नुकसान की जवाबदेही तय नहीं की गई।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
विभाग के कुछ कर्मचारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों ने पूरे प्रकरण की उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance) तथा ऊर्जा विभाग से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जी तकनीकी रिपोर्ट की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
AWAZ PLUS की मांग
सरकारी संपत्ति जनता के टैक्स के पैसे से तैयार होती है। यदि करोड़ों रुपये के पावर ट्रांसफार्मर के क्षतिग्रस्त होने के बाद जांच प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं, तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की समिति से पूरे प्रकरण की जांच कराई जानी चाहिए। इससे न केवल वास्तविक कारण सामने आएंगे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, सूत्रों एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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